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Director's Message

भारत जैसे विविधता से भरे ग्राम प्रधान देश में स्थानीय समस्यायें व आवष्यकतायें अलग-अलग हैं। ऐसी परिस्थिति में स्थानीय स्व-शासन एवं पंचायती राज की परिकल्पना स्वाभाविक है जिसके माध्यम से स्थानीय विकास को सही दिशा प्रदान की जा सकती है। भारतीय संविधान के 73वें संशोधन के तहत त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक मान्यता प्रदान कर ग्रामीण विकास में स्थानीय लोगों की भागीदारी का मार्ग प्रशस्त किया गया है।
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