गांव तक पहुंचती आधुनिक सुविधाएं

अर्चना महतो, मुखिया, मुर्रामकला पंचायत, रामगढ़ प्रखंड (रामगढ़)
डॉ. विष्णु राजगढि़या

archana-mahtoमहिलाओं के स्वयं सहायता समूहों तथा सिंचाई के नये साधनों के कारण मुर्रामकला पंचायत में विकास की गति तेज हो गई है। रामगढ़ शहर से सटी इस पंचायत की मुखिया अर्चना महतो की कोशिशों का लाभ दिखाई देने लगा है। पंचायत के अन्य प्रतिनिधियों के सहयोग से इस क्षेत्र में नशाखोरी के खिलाफ अभियान तथा शिक्षा के विकास की कोशिशें भी सफल हुई है। इतिहास में स्नातक की शिक्षा हासिल करके अर्चना महतो ने मुर्रामकला को आदर्श पंचायत बनाने का संकल्प लिया है। अर्चना महतो कहती हैं कि रामगढ़ षहर से एकदम सटी होने के कारण हमारी पंचायत के ग्रामीणों को आधुनिक विकास की सभी चीजें हासिल करने की ललक है। पंचायती राज व्यवस्था में तेजी से बढ़ते अवसरों के कारण ग्रामीणों के लिए अपनी जरूरत की आधुुनिक सुविधाएं हासिल करना संभव हो पा रहा है।

इस पंचायत क्षेत्र में लगभग 98 कुंओं तथा तीन तालाबों का निर्माण होने से किसानों को खेती-बारी में काफी सुविधा मिली है। इस पंचायत में चार गांव हैं- कांकेबार, बुढ़ाखुखरा, गोसा तथा मुर्रामकला। इन चारों गांवों को सब्जी की अच्छी खेती वाले इलाके के बतौर देखा जा रहा है। मुर्रामकला गांव के निरंजन महतो के खेत में बने कुंए ने किस्मत ही बदल कर रख दी है। पहले सिर्फ बारिश के दिनों मेें एकाध किस्म की थोड़़ी बहुत फसल हो जाती थी। अब कई तरह की सब्जियां, अनाज और फल लगाना आसान हो गया है। निरंजन महतो के परिवार के सभी लोगों को खुशी है कि सिंचाई के नये साधन ने उनके लिए रोजगार का शानदार अवसर मुहैया कराया है।

पहले इस पंचायत के गांवों को नशाखोरी के लिए जाना जाता था। लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों ने ग्रामीण महिलाओं का समूह बनाकर घर-घर घूमना और दारू की भठियों को बन्द कराना शुरू किया। नशाखोरी करने वाले लोगांे को समझा-बुझाने तथा नहीं मानने पर सामाजिक रूप से दण्डात्मक कार्रवाई का सिलसिला भी शुरू किया गया। इसके कारण नशाखोरी पर लगान लगी और शराब की चुलाई बंद हो गयी। जो लोग पहले नशे में डूबे रहते थे, वे लोग अब विकास योजनाओं का लाभ उठाने की सकारात्मक कोशिश करते देखे जा रहे हैं। नषाखोरी के खिलाफ अभियान के कारण इस इलाके को रेड अलर्ट जोन भी कहा जाने लगा है।

इस पंचायत के गांवों में महिलाओं के कई स्वयं सहायता समूह पहले से ही कार्यरत थे। पंचायत प्रतिनिधियों ने इन समूहों को बढ़वा देने की भरपूर कोशिश की है। फिलहाल इस पंचायत में ऐसे स्वयं सहायता समूहों की संख्या लगभग 150 होने का अनुमान है। इनमें से लगभग 60 समूहों का बैंक लिंकेज भी है जिसके कारण स्थानीय महिलाओं को स्वरोजगार के काफी अवसर मिल रहे हैं। इन समूहों द्वारा मशरूम उत्पादन, गाय पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, सिलाई-बुनाई जैसे विभिन्न उत्पादक कार्य किये जा रहे हैं। संतोषी महिला मंडल सहायता समूह को बैंक से ढाई लाख रूपया ऋण मिला जिसमें एक लाख रूपये का अनुदान था। समूह ने 150 बकरियां पालने का केन्द्र शुरू किया और इससे हुई कमाई जरिए ऋण की राशि भी लौटा दी। इसी तरह, स्वशक्ति लक्ष्मी महिला संघ ने गौ पालन के लिए डेयरी खोली है। इस समूह में 13 सदस्य हैं। इसी समूह की लालो देवी गाय पालन को रोजगार का सबसे अच्छा साधन मानती है।

इस पंचायत का नया भवन अब तक नहीं बन पाया है। लेकिन पुराने भवन को ही जीवन्त रूप से चलाने की हर संभव कोशिश की जाती है। इस भवन में प्रज्ञा केेन्द्र सही तरीके से चल रहा है। यहां प्रमाणपत्र बनाने से लेकर बैंक खाता खोलने जैसे काम आसानी से हो जाते है। इस पंचायत के गांवों में पहले सार्वजनिक चैपाल नहीं थी। बीआरजीएफ के फंड से पंचायत के तीन गांवों में चैपाल का निर्माण कराया गया है। इससे ग्रामीणों को सार्वजनिक बैठक करने में सुविधा हो रही है।

ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति भी इस पंचायत के सभी गांवों मंे काफी सक्रिय है। मुर्रामकला में 41 तथा बुढाखुखरा में 20 शौचालयों का निर्माण कराया गया है। घरों में पेयजल की लगातार आपूर्ति की भी कोशिश की जा रही है। ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति द्वारा चयनित जल सहिया हर घर से पानी के मद मंे 80 रूपये प्रति महीने लेती है। पेयजल आपूर्ति के काम में दो पंप आॅपरेटर लगे हैं। हरेक को 4500 रूपये का भुगतान करना तथा तीन पम्प के रख-रखाव एवं बिजली बिल का भुगतान करना जैसे काम समिति द्वारा सफलता पूर्वक संचालित  किए जा रहे हैं।

इस पंचायत के सेवक को एक अन्य पंचायत का भी दायित्व होने के कारण पंचायत के कामों में थोड़ी असुविधा आती है। लेकिन वार्ड सदस्यों की सक्रियता के कारण कोई काम रूकता नहीं हैं। इस पंचायत के 12 वार्ड सदस्यों में सात महिला हैं। इससे इस क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण भी हो रहा है। इस पंचायत क्षेत्र में कुल 9 आंगनबाड़ी है जिनमें एक फिलहाल बंद है। वहां सेविका नहीं होने के कारण आने वाली परेशानी का हल ढूंढने की कोशिश की जा रही है। शेष आठों आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन बेहतर ढंग से हो रहा है। इन केंद्रों से सूखा राषन एवं पोषाहार के वितरण का काम विधिवत होने लगा है। साथ ही यहां एएनएम द्वारा टीकाकरण करने के काम में भी सुधार देखा गया है।

मुर्रामकला पंचायत क्षेत्र में जनवितरण प्रणाली की लगातार निगरानी करने का भी अच्छा असर देखा जा रहा है। गरीबी रेखा के नीचे परिवारों के लिए अनुदानित दर पर चावल के वितरण में पहले कई बार मनमानी की षिकायतें मिलती थीं। पंचायत चुनाव के बाद प्रतिनिधियों ने इसे सुधारने की पहल की। उन्होंने बीपीएल के लिए चावल के वितरण के दौरान स्वयं उपस्थित होकर पूरी प्रक्रिया की सघन निगरानी षुरू कर दी। इसके कारण गरीबों को उनके हक का अनाज मिलने लगा।

इस पंचायत के चार गांवों को मिलाकर कई प्राइमरी स्कूल, मिडिल स्कूल और हाई स्कूल हैं। इन स्कूलों में षिक्षकों की उपस्थिति सुनिष्चित करने के लिए पंचायत समिति के सदस्यों द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। इसके कारण कतिपय षिक्षकों के लिए पहले की तरह लापरवाही बरतना मुष्किल हो गया है।

मुर्रामकला पंचायत में बीआरजीएफ योजना के तहत दो कलवर्ट तथा एक नाली का निर्माण हो चुका है। इनमें से एक बूढ़ा खुखरा में तथा दूसरा मुर्रामकला गांव में है। इसी योजना के तहत एक नाली भी बनायी गयी है। मनरेगा के अंतर्गत मिट्टी मोरम की पांच सड़कों का निर्माण हुआ है। इसके अलावा गोसा, बूूढ़ा खुखरा एवं मुर्रामकला गांवों में एक-एक तालाब भी मनरेगा के अंतर्गत बनाये गये हैं। इस पंचायत के प्रतिनिधियों ने विकेंद्रीकृत जिला योजना के अंतर्गत वार्षिक कार्ययोजना का निर्माण शुरू कर दिया है।

Good Practice Story Published in May 2013 in Panchayat Nama

(Mrs. Archana Mehta, Mukhiya, Muramkala, Ramgarh)