टाटी पूर्वी में पोषण पर विशेष ग्रामसभा

tati-purvi-26-8-13-Nutrition-COMBINED_Lowपंचायती राज विभाग, भारत सरकार ने हाल में विज्ञापन निकाल कर यह निर्देश जारी किया कि देश की सभी पंचायतें पोषण के मुद्दे पर विशेष ग्रामसभा करें. इस निर्देश के अनुरूप 26 अगस्त 2013 को पंचायतनामा की पहल पर रांची के नामकुम प्रखंड की टाटी पूर्वी पंचायत में विशेष ग्रामसभा का आयोजन किया गया. दरअसल, झारखंड में 25 पंचायतों को अगुआ पंचायत के रूप में विकसित करने के लिए चुना गया है. यूनिसेफ एवं सर्ड के सहयोग से झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर ने यह पहल की है। चुनी गयी पंचायतों में अलग-अलग संस्थाओं को इस कार्य में सहयोग करने की जिम्मेवारी सौंपी गयी है। इसी के तहत पंचायतनामा को टाटी पूर्वी पंचायत को हर क्षेत्र में अग्रणी बनाने में सहयोग की जिम्मेवारी दी गयी है। यही कारण है कि पंचायतनामा की टीम ने इस पंचायत में पोषण पर विषेष ग्राम सभा के आयोजन में सहयोग किया तथा एक सफल आयोजन संभव हुआ।

इस बार टाटी पूर्वी में आयोजित ग्रामसभा की बैठक पिछली सभी बैठकों से अलग थी. पंचायत भवन की जगह टांटी भागलपुर गांव के बगीचे को बैठक के लिए चुना गया, ताकि अधिक से अधिक लोग बैठक में जुट सकें पंचायतनामा, मुखिया किरण पाहन व प्रधान अर्जुन पाहन की इस पहल का अच्छा नतीजा आया विषेष ग्रामसभा में बड़ी संख्या में लोग जुटे. खासकर महिलाएं. महिलाओं की संख्या पुरुषों की संख्या से ढाई-तीन गुणा थी लगभग 75-80 लोग इस ग्रामसभा में जुटे थे।

हालांकि जिला प्रशासन द्वारा तय कार्यक्रम के तहत रांची की हर पंचायत में 26 तारीख को ग्रामसभा होती है. जिला प्रशासन ने इस बार 26 अगस्त को पंचायतों को मनरेगा की वार्षिक कार्ययोजना वर्ष 2014-15 के लिए तैयार करने के लिए बैठक बुलाने का निर्देश दिया था। इसलिए इस विषेष ग्रामसभा में मनरेगा योजनाओं सहित अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई. साथ ही पोषण, पेयजल एवं स्वच्छता से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।

पोषण पर विषेष चर्चा – प्रारंभ में पंचायतनामा के प्रतिनिधि पुष्यमित्र ने ग्राम प्रधान, मुखिया तथा पंचायत प्रतिनिधियों के बीच पोषण के विषय पर ग्रामसभा में चर्चा के बिंदुओं के संबंध में झारखंड पंचायत महिला रिसार्स सेंटर द्वारा जारी सुझावों की प्रतियों का वितरण किया।

इसके आधार पर चर्चा शुरू की गयी प्रधान, मुखिया व पंचायतनामा के साथियों ने लोगों का ध्यान इस सवाल पर खींचा कि बच्चों के पोषण का क्या मानक है? एक आंगनबाड़ी सेविका ने इस सवाल का जवाब दिया कि स्केल से बांह की मोटाई माप कर बच्चे के पोषण के स्तर का पता लगाया जाता है। इसके आधार पर अति कुपोषित बच्चों को लाल क्षेत्र में व कुपोषित बच्चों को पीला क्षेत्र में रखा जाता है और उसके अनुरूप उसे पोषणा दिया जाता है।

बैठक में वार्ड सदस्यों पर यह जिम्मेवारी सौंपी गयी कि वे नियमित रूप से अपने वार्ड क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करेंगे और वहां बच्चों के पोषण के स्तर को देखेंगे। ग्रामसभा में टीका व स्वच्छता के मुद्दे पर भी चर्चा की गयी। बताया गया कि पोषण का एक जरूरी आयाम है स्वच्छता हर व्यक्ति को साबुन से अच्छी तरह से हाथ धोना चाहिए। महिलाओं के मुद्दे पर चर्चा करते हुए पंचायतनामा के साथियों ने ग्रामीणों का ध्यान इस ओर दिलाया कि झारखंड की आधी से ज्यादा महिलाएं कुपोषित हैं। ग्रामीणों से महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की अपील की गयी। बताया गया कि माताएं स्वस्थ रहेंगी, तो गांव-देश को स्वस्थ बच्चे व स्वस्थ नागरिक मिलेंगे। बच्चों को टीका दिलवाने, मां का दूध देने, गर्भवती महिलाओं को आयरन का टेबलेट देने सहित अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई।

ग्रामसभा में पंचायत प्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों ने पेयजल एवं स्वच्छता के मुद्दे पर भी खुलकर चर्चा कि और हर घर में शौचालय को जरूरी बताया। ग्रामीणों ने यह निर्णय लिया कि प्रत्येक वार्ड सदस्य अपने-अपने वार्ड क्षेत्र में यह पता लगायेंगे कि फिलहाल कितने घरों में शौचायल नहीं है। ऐसे लोगों की सूची तैयार कर उसे अगली ग्रामसभा में रखा जाएगा। उस सूची के आधार पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पास गांव में शौचायल निर्माण का आवेदन दिया जाएगा। लोगों ने गांव में संपूर्ण स्वच्छता लाने की बात कही। इस मुद्दे पर लोगों ने विशेष सक्रियता दिखायी।

ग्रामसभा में मनरेगा के मुद्दे पर चर्चा करते हुए इस बात पर चिंता जतायी गयी कि मनरेगा के तहत अनुसूचित जाति व जनजाति के लोग योजनाएं लेने के राजी नहीं होते अगर कुछ लोग योजनाएं लेते भी हैं, तो श्रमिकों की कमी के चलते वे योजनाएं पूरी नहीं होतीं। प्रधान व दूसरे ग्रामीणों ने बताया कि शहर से नजदीक होने के कारण मनरेगा की मजदूरी से ज्यादा दूसरी जगह काम कर लोग कमा लेते हैं. मनरेगा में सप्ताह-दस दिन बाद पैसा मिलना भी इसका एक कारण है बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया कि अगर अनुसूचित जाति व जनजाति के लोग मनरेगा से कूप, समतलीकरण व अन्य योजनाएं लेने में रुचि नहीं लेते तो पिछड़े व अन्य वर्ग के लोगों का नाम इसके लिए प्रखंड व जिला कार्यालय को भेजा जाएगा। इस पर ग्रामसभा में आम सहमति बनने के बाद विभिन्न वर्ग से ऐसे लोगों के नाम की सूची तैयार की गयी जो मनरेगा से योजना लेना चाहते हैं। इसमें समितान फैक्टरी से मिसरा बगीचा तक मिट्टी मोरम पथ, मिसरा टोला से तीन सरैया तक मिट्टी मोरम पथ जैसी योजनाओं का नाम भी जोड़ गया।

अंत में सबने टाटी पूर्वी पंचायत को कुपोषण मुक्त करने का संकल्प लेते हुए नारे लगाये – कुपोषण टाटी पूर्वी छोड़ो, कुपोषण झारखंड छोड़ो कुपोषण भारत छोड़ो।