पंचायत में पारदर्शिता

अनीता देवी, मुखिया, गेतलसूद पंचायत, अनगड़ा प्रखंड (रांची)
डॉ. विष्णु राजगढि़या

anita-deviपहली बार इस पंचायत के लोगों को यह पता चल रहा है कि उनके क्षेत्र में विकास का कौन-सा काम हुआ और इसमें कितने रुपये खर्च हुए। अब उन्हें यह भी आसानी से पता चल जाता है कि इंदिरा आवास योजना की प्रतीक्षा सूची में किन लोगों के नाम हैं, किन-किन लोगों को इस योजना का लाभ मिला है और किसे कितनी राषि दी गयी है। प्रधानमंत्री सड़क निर्माण योजना का काम हो, या फिर मनरेगा का, हर काम में हुए खर्च का पूरा ब्योरा आसानी से मिल जाता है। इसके लिए किसी से पूछने की भी जरूरत नहीं पड़ती। सारा कुछ पंचायत भवन के नोटिस बोर्ड पर टंगा हुआ है।

गेतलसूद पंचायत को भारत सरकार के पायलट प्रोजेक्ट के तहत पारदर्षिता के लिए चयनित किये जाने से इस इलाके के लोग काफी उत्साहित हैं। रांची जिले के अनगड़ा प्रखंड की इस पंचायत ने पारदर्षिता का अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया है। गेतलसूद पंचायत की मुखिया अनीता देवी कहती हैं कि पारदर्षिता जरूरी है क्योंकि इसके जरिये ही असली विकास संभव है। पहले लाभुक को खुद पता नहीं होता था कि कूप के निर्माण में कितना खर्च हुआ। इसके कारण भ्रष्टाचार की संभावना रहती थी। लेकिन अब किसी बिचैलिये या किसी भ्रष्टाचार की गुंजाइष नहीं रही। यह बताते हुए अनीता देवी कई उदाहरण याद करती हैं, जिनसे पता चलता है कि योजनाओं में पारदर्षिता लाने से काम की गुणवत्ता बेहतर होती है और कमीषनखोरी पर भी लगाम लगती है।

पंचायत के लिए किसी भी प्रकार की खरीददारी करने या कोई खर्च करने से पहले वार्ड सदस्यों या ग्राम सभा के सामने उसका पूरा विवरण पेष कर दिया जाता है। सबकी सहमति मिलने के बाद ही कोई काम होता है। इसके कारण गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं रह जाती है। मनरेगा में होने वाले सारे काम और मजदूरी के भुगतान का विवरण भी पंचायत भवन के नोटिस बोर्ड पर चिपका दिया जाता है। इसके कारण कोई भी जाकर देख सकता है कि कहीं कोई अनियमितता है अथवा नहीं। पारदर्षिता के लिए पंचायत भवन की दीवारों पर लेखन भी करा दिया जाता है क्योंकि नोटिस बोर्ड पर लगी हुई नोटिस कुछ दिनों में खराब हो जाती है, जबकि दीवार लेखन लंबे समय तक रहता है और दूर से ही कोई भी इसे देख सकता है।

गेतलसूद पंचायत की ग्राम सभा हर 26 तारीख को होती है। 26 सिंतबर 2012 को हुई ग्राम सभा में काफी पारदर्षी तरीके से अपनी पंचवर्षीय योजना बनायी गयी, जिसे 2 अक्टूबर 2012 को आम सभा में पारित कराया गया। इस पंचायत क्षेत्र में नरेगा में होने वाले किसी भी काम में तथा मजदूरी की भुगतान में कोई षिकायत नहीं आती है। कई किसानों को कुआं तथा ड्रीप ऐरिगेषन का लाभ मिला है। इसके कारण किसानों को अपने खेतों में बेहतर सिंचाई के अवसर मिल रहे हैं तथा कम मेहनत में ज्यादा उपज की उम्मीद बढ़ गयी है।

मनरेगा में इस वर्ष 20 कुएं बनाये गये हैं तथा सात कुआंे की मरम्मत हुई है। तीन तालाबों का निर्माण पूरा हो गया है तथा दो तालाबों का निर्माण हो रहा है। प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत एक कच्ची सड़क का कालीकरण भी हो रहा है। महिला सहायता समूह को पाॅली हाउस मिला है तथा सिलाई प्रषिक्षण, फूलों की पैदावार का प्रषिक्षण दिया जा रहा है। इस गांव में एक स्वास्थ्य केंद्र पहले से मौजूद है लेकिन अब बेड वाला अस्पताल बन रहा है। इस पंचायत के अंतर्गत बाजार समिति बनाने की स्वीकृति मिल गयी है तथा इसके लिए षिलान्यास हो चुका है। आंगनबाड़ी केंद्र बनाने और कृषि का गोदाम बनाने का भी काम हो रहा है। पंचायत क्षेत्र में आदिम जनजाति बिरहोर के लिए इंदिरा आवास भी उपलब्ध कराये गये हैं।

झारखंड में पंचायत चुनाव 32 साल के बाद हुए हैं। ग्रामीणों को स्थानीय स्वषासन का अवसर अब नये सिरे से मिलने का साफ असर देखा जा रहा है। जो काम आजादी के 65 साल बाद तक नहीं हुआ था, उसकी बुनियाद इन दो वर्षों के अंदर पड़ चुकी है। खासतौर पर पारदर्षिता के इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता का असर अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ना स्वाभाविक है।