पहली वर्षगांठ पर हुआ सेमिनार

Release-of-Report_Lowरांची। झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर की पहली वर्षगांठ पर होटल अशोका में 25 जुलाई 2013 को एकदिवसीय सेमिनार संपन्न हुआ। इसमें राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर प्रसाद, ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव श्री आर.एस. पोद्दार तथा इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली के चेयरमैन डॉ. जार्ज मैथ्यू शामिल हुए। सेमिनार में एक साल का रिपोर्ट कार्ड जारी किया गया। संचालन जेपीडब्ल्यूआरसी के राज्य समन्वयक डॉ. विष्णु राजगढि़या ने किया।

प्रारंभ में स्वागत करते हुए सर्ड निदेशक श्री आरपी सिंह ने कहा कि जिस तरह किसी बच्चे की पहली वर्षगांठ बहुत खास मानी जाती है, उसी भांति झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर का आज एक साल पूरा होना कई मायने में विशेष है। 32 सालों बाद पंचायत चुनाव में 57 फीसदी सीटों पर महिलाएं आईं। उन्हें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। इसलिए यूनिसेफ, मंथन, राज्य महिला आयोग और सर्ड ने झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर बनाया।

यूनिसेफ के कार्यक्रम अधिकारी श्री कुमार प्रेमचंद ने कहा कि  हम ऐसा कुछ काम करना चाहते थे जिसका कोई ठोस परिणाम निकले और इसका प्रभाव दिखे। महिला रिसोर्स सेंटर एक बड़ी उपलब्धि है। पंचायत की पगडंडी इसी का हिस्सा है। पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण के लिए और भी कई प्रशिक्षण सामग्री प्रकाशित की गई है। उन्होंने अगुवा पंचायत की अवधारणा बताते हुए कहा कि प्रत्येक प्रखंड से दो आदर्श उदाहरण लिए जाएंगे जिससे दूसरी पंचायतों को भी सीखने को मिले। ब्लॉग, वेबसाइट के जरिए महिला रिसोर्स सेंटर के बारे में एक ही जगह पंचायतों से जुड़ी सूचनाएं मिल जाएंगी। श्री कुमार प्रेमचंद ने पंचायत प्रतिनिधियों से सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि वे बताएं कि उन्हें किस तरह के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। वे अपनी जरूरतों और क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम के संबंध में अपनी सलाह दें, विचार रखें।

ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड के प्रधान सचिव श्री आरएस पोद्दार  ने प्रत्येक प्रखंड में एक पंचायत को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुनने का सुझाव देते हुए कहा कि आगामी चार वर्षों के लिए योजना बनाएं। योजना बनाने के क्रम में स्थानीय समुदाय की मांग, आवश्यकताओं, जरूरतों को देखना है। इसके लिए पंचायत अपनी ग्रामसभा के मंच का प्रयोग करें। एनजीओ की भी योजना निर्माण में  बड़ी भूमिका है। योजना ऐसी बनायी जानी है जिससे स्थानीय समुदाय को रोजगार, आजीविका के अवसर पैदा हों। दूसरी बुनियादी जरूरतें भी इसके जरिए पूरी हो सके, इसे देखना है। महिला रिसोर्स सेंटर के प्रयासों की सराहना करते हुए श्री पोद्दार ने कहा कि राज्य को महिला पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से सफल नेतृत्व भी मिलेगा।

झारखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. हेमलता एस मोहन ने कहा कि महिला रिसोर्स सेंटर महिला प्रतिनिधियों के लिए महत्वपूर्ण काम कर रहा है। मुखिया, पंचायत समिति, जिला परिषद के पास अभी कई महत्वपूर्ण अधिकार हैं। उन्हें समझने और प्रभावी उपयोग के बारे में जानने की जरूरत है। समस्या महज अधिकारों को लेकर है, अपने कर्तव्यों की बात हम नहीं कर रहे हैं। रिसोर्स सेंटर अधिकार और कर्तव्य, दोनों के बारे में जागरूक कर रहा है।

पंचायती राज के विशेषज्ञ और नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस के निदेशक  डॉ. जार्ज मैथ्यू ने पंचायत, ग्राम सभा और ग्राम सभा में स्थानीय समुदाय की अधिक से अधिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने झारखंड को केरल से सीखने की सलाह देते हुए कहा कि पंचायतों को मजबूत किये बगैर राज्य का विकास अधूरा है। उन्होंने कहा कि केरल में एक-एक पंचायत को दो दो करोड़ तक का स्वतंत्र बजट मिलता है तथा उस राज्य के त्वरित विकास का रहस्य पंचायती राज में ही छिपा है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद हमारे संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में पंचायत की बात कही गयी, लेकिन असली पंचायती राज आने में 44 साल का वक्त लगा। इसके कारण अंग्रेजों से विरासत में मिली नौकरशाही मानसिकता हावी रही। उसे बदलने में समय लग रहा है।  डॉ. मैथ्यू ने कहा कि झारखंड में विकास की अपार संभावनाएं हैं और यह पंचायती राज के जरिये ही संभव है।

AA-9-Sudhirझारखंड के अतिरिक्त मुख्य सचिव और मुख्य अतिथि श्री सुधीर प्रसाद ने हमारा पंचायत, हमारा भविष्य की अवधारणा मजबूत करने की बात कही। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की योजनाओं से जुड़ी जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि अब (2013-2014 से) इंदिरा आवास के लाभुकों को शौचालय निर्माण के लिए भी पैसा मिलेगा। यह पैसा ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के पास जाएगा। इस समिति के गठन और उपयोगिता का महत्व बताते हुए श्री प्रसाद ने रांची के बेड़ो पंचायत मुखिया श्री राकेश भगत द्वारा ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के माध्यम से बेड़ो में पेयजल के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज लोग केरल की पंचायत देखने की बात करते हैं, लेकिन अगर रांची जिले की बेड़ो पंचायत जाकर देखें तो वहां भी आपको अच्छा काम देखने को मिलेगा। उन्होंने दूसरी पंचायतों को उनसे प्रेरणा लेने को कहा। उन्होंने पेयजल विभाग के टोल फ्री नंबर 18003456502 और 180034565016 का अधिक से अधिक प्रयोग करने की अपील पंचायत प्रतिनिधियों से की और बताया कि वे स्वयं इन नंबरों पर दर्ज शिकायतों और निष्पादन संबंधी प्रक्रियाओं की निगरानी कर रहे हैं।

पंचायती राज विभाग के पूर्व निदेशक श्री गणेश प्रसाद ने सामाजिक बदलाव के लिए सामाजिक सहभागिता बढ़ाने की सलाह दी। सुप्रीम कोर्ट कमिश्नर के राज्य सलाहकार श्री बलराम ने जेपीडब्ल्यूआरसी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह सेंटर पंचायत स्तर तक प्रभाव डाल रहा है। सेमिनार में पंचायती राज विभाग के उपनिदेशक श्री परमेश्वर भगत, सीटीआइ के प्राचार्य श्री के.के. सिंह, सीटीआइ के व्याख्याता श्री अजीत कुमार सिंह, सर्ड के उपनिदेशक श्री महावदेव धान एवं श्रीमती सुमन कैथरीन किस्पोट्टा, सर्ड की फेकेल्टी श्रीमती शुभा कुमार, श्री अशोक साह, श्री एस.पी. सिंह एवं श्री राजीव रंजन, इंजीनियर श्री विजय रस्तोगी, यूनिसेफ कंसल्टेंट श्री सुबीर कुमार दास, श्री रोबर्ट, श्रीमती शैली एवं श्रीमती रिचा चैधरी, मंथन युवा संस्थान के समन्वयक श्री सुधीर पाल राज्य महिला समाख्या की डॉ. स्मिता गुप्ता, मनरेगा लोकपाल श्री गुरजीत सिंह भी शामिल हुए। मंथन युवा संस्थान, विकास भारती, एनबीजेके, केजीवीके और डेवनेट प्रतिनिधियों के अलावा यूनिसेफ और पंचायती राज विभाग ने अपनी-अपनी बातें रखीं। नवभारत जागृति केंद्र की प्रतिनिधि श्रीमती सुष्मिता भट्टाचार्य, श्री रामकृष्ण मिशन की प्रतिनिधि डॉ. अंजलि चंद्रा एवं बदलाव फाउंडेशन की श्रीमती आशा राठौर, विकास भारती के प्रतिनिधि श्री मिथिलेश मैत्री, मंथन युवा संस्थान के प्रतिनिधि श्री वीपी पांडेय, यूनिसेफ वोलेंटियर नेयाज अहमद, खलारी पंचायत की मुखिया श्रीमती तेजी किस्पोट्टा, घाटशिला प्रखंड की प्रमुख श्रीमती श्रुति देवगम इत्यादि ने विचार रखे।
प्रस्तुति – अमित कुमार झा