राष्ट्रीय पोषण सप्ताह पर विशेष

डॉ. जगन्नाथ की गोद में स्नेहिल-स्नेहा

baby at MTC Chaibasa रांची: सात महीने पहले 13 जनवरी को जन्मे थे स्नेहिल-स्नेहा। जन्म देते ही बेहद गरीब मां ननिका सिद्दू ने सदा के लिए आंखें मूंद लीं। गरीब आदिवासी परिवार के इस जुड़वा भाई-बहन का भी बचना मुश्किल लग रहा था। इसलिए दूसरे ही दिन दोनों को चाईबासा के एमटीसी में पहुंचा दिया गया। कुपोषित बच्चों के विशेष उपचार के इस केंद्र में डॉ. जगन्नाथ ने दोनों को अपने बच्चों की तरह पाला। दोनों अब स्वस्थ हैं।

पूरा देश जब सितंबर के पहले सप्ताह में राष्ट्रीय कुपोषण सप्ताह मना रहा हो, तब झारखंड में कुपोषित बच्चों को नया जीवन देने वाले डॉ. जगन्नाथ जैसे नायकों को जानना जरूरी है। हर जिले में मौजूद ऐसे दो कुपोषण चिकित्सा केंद्रों में मिलने वाली विशेष सुविधाओं के बारे में भी जागरूकता फैलाकर जिन अबोध बच्चों के लिए ऐसे केंद्र बने हैं, उन बच्चों को इसका लाभ और जीवनदान देना जरूरी है।

यह कहानी है झारखंड की उन लाखों माताओं एवं नवजात शिशुओं की, जो कुपोषण के कारण असमय मौत या गंभीर रोग का शिकार होते हैं। ऐसी माताओं एवं बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी अज्ञानतावश नहीं मिल पाता।

Dr Jagganath with Mr Job Zachariah, UNICEFचाईबासा एमटीसी के डॉ. जगन्नाथ को आप कुपोषित बच्चों का नाथ कह सकते हैं। उनके लिए कुपोषित बच्चों के इस विशेष उपचार केंद्र में काम करना नौकरी नहीं, जिंदगी का मकसद है। उनकी लगन ने सैकड़ों बच्चों को नया जीवन दिया है।

चाईबासा के टोंटो प्रखंड के उदलखम गांव के इन जुड़वा बच्चों को नाम भी खुद डॉ. जगन्नाथ ने ही दिया है। नाम देता भी कौन। मां तो जनम देकर मर गयी। बाप सोदम सिद्दू एक सप्ताह बाद कुछ अनजान लोगों को लेकर आया और कहा कि दोनों बच्चों को ये लोग ले जाना चाहते हैं। डॉ. जगन्नाथ ने इसकी अनुमति नहीं दी। दो कारण से। पहता तो बच्चों का इलाज जरूरी था। दूसरे, उन्होंने सोचा कोई इन बच्चों के पिता की गरीबी का लाभ न उठा ले।

उसके बाद से दोनों बच्चों का पिता अब तक नहीं आया है। बच्चों का स्वास्थ्य ठीक होने के बाद उसके पिता को खबर की गयी तो जवाब मिला कि बाद में आएंगे। स्नेहिल-स्नेहा की किलकारियां एमटीसी में गूंजती हैं तो डॉ. जगन्नाथ को अच्छा लगता है। हालांकि एमटीसी में ऐसे बच्चों को ज्यादा दिन रखने का प्रावधान नहीं है। यहां तो गंभीर कुपोषण से बाहर निकालकर वापस भेज देना है। लेकिन जिन बच्चों की मां जन्म देकर गुजर जाए और बाप को कोई खास लगाव न हो, उनके लिए डॉ. जगन्नाथ जैसे लोग तो हैं न!