केंद्रीय पंचायती राज मंत्री के साथ प्रतिनिधियों का संवाद

SIRD - 29 Oct. Minister Panchayat

 रांची, 29 अक्तूबर 2013:: भारत सरकार के पंचायती राज एवं आदिवासी मामले विभाग के केंद्रीय मंत्री श्री वी. किशोर चंद्र देव ने आज सर्ड में पंचायती राज प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने झारखंड में पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक मदद का भरोसा दिलाया। कार्यक्रम में झारखंड के पंचायती राज, ग्रामीण विकास एवं श्रम नियोजन विभाग के मंत्री श्री चंद्रशेखर दुबे ने भी पंचायती राज संस्थाओं के सशक्तिकरण पर पंचायत प्रतिनिधियों के साथ विचार विमर्श किया।

प्रारंभ में सर्ड के निदेशक श्री आर. पी. सिंह ने माननीय मंत्री एवं अधिकारियों का स्वागत करते हुए राज्य में पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता वर्द्धन संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी। इसके बाद झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर के राज्य समन्वयक डाॅ. विष्णु राजगढि़या ने राज्य में पंचायती राज संस्थाओं की स्थिति के संबंध में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया।

माननीय केंद्रीय मंत्री श्री वी. किशोर चंद्र देव ने अपने संबोधन में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) तथा राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान (आरजीपीएसए) को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में झारखंड में पंचायत चुनाव होंगे। वर्तमान प्रतिनिधियों ने अपने कार्यकाल का आधा समय पूरा कर लिया है। इसलिए अब पंचायती राज संस्थाओं को वर्ष 2015 तक के लक्ष्यों का एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार कर लेना चाहिए ताकि मतदाताओं की आशाओं को पूरा किया जा सके। माननीय मंत्री श्री चंद्रशेखर दुबे ने झारखंड में नौ विभागों द्वारा पंचायतों को दी गयी शक्तियों की जानकारी देते हुए कहा कि शेष विभागों द्वारा जल्द ही पंचायतों को शक्तियों का प्रत्यायोजन कर दिया जाएगा।

 

कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आये पंचायत प्रतिनिधियों ने राज्य में पंचायत संबंधी विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे। इस दौरान पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के एडिशनल सेकेट्री डाॅ. हृषिकेश पंडा ने पंचायत प्रतिनिधियों के हर मसले पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद माननीय केंद्रीय मंत्री श्री वी. किशोर चंद्र देव ने इन विषयों पर समुचित कदम उठाने का निर्देश दिया। अंत में पंचायती राज विभाग, झारखंड के प्रधान सचिव श्री एल. ख्यांग्ते ने पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा उठाये गये विषयों एवं माननीय मंत्रीद्वय के निर्देश के आलोक में समुचित कार्रवाई की बात कही। कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के वरीय आर्थिक सलाहकार डाॅ. अवतार सिंह सहोता तथा पंचायती राज विभाग झारखंड एवं सर्ड के पदाधिकारी एवं व्याख्याता मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन सर्ड की व्याख्याता डाॅ मिनी रानी शर्मा ने किया।

 

माननीय केंद्रीय मंत्री श्री वी. किशोर चंद्र देव के संवोधन की मूल प्रति इस प्रकार है-
1.   मुझे झारखंड के पंचायती राज संस्थाेओं के निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए बहुत  खुशी  हो रही है ।  आशा हैए यहां उपस्थिंत बहुत से प्रतिनिधि विज्ञान भवनए नई दिल्ली में 24 अप्रैल 2013 को आयोजित राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस सम्मेालन में शामिल हुए होंगे । आज महान् आदिवासी  विभूति  बिरसा मुंडाए तिलका मांझीए सिद्धू एवं कान्हू द्वारा ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान दी गई कुर्बानी को सच्चीा श्रद्धांजलि देते हुए मैं अभिभूत हूं। जनजाति बहुल झारखंड राज्यक का गठन महान् बिरसा मुण्डाा की जयंती के शुभ अवसर पर 15 नवंबर 2000 को 18 जिलों के साथ हुआ । झारखंड में अब 24 जिले हैं। पिछले 13 वर्षों में झारखंड में नौ सरकारें ;वर्तमान सरकार को मिलाकरद्ध आईं एवं  तीन बार राष्ट्रपति शासन लगा । जिससे राज्य में स्थिार सरकार न होने की वजह से पंचायती राज की प्रगति बढ़ने की दिशा में बाधा आई ।

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2. भारत के इस 28 वें राज्य झारखंड में तीन स्तजरीय पंचायत  चुनाव 32 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद नवंबर.दिसंबर 2010 में हुए । हम आशा करते हैं कि वर्तमान सरकार एवं प्रशासन संवैधानिक अधिदेश के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं को अधिकारोंए उत्तररदायित्वोंा एवं संसाधनों के अंतरण के  माध्यंम से अधिकारों के विकेन्द्रीकरण की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेगी । मुझे पूरा विश्वा स है कि पंचायती  राज में हो रहे तीव्र विकास से झारखंड के ग्रामीणों विशेषकर जनजातीय लोगों का विकास और तेजी से होगा । निर्वाचित प्रतिनिधियों में लोगों का अटूट विश्वा स है और इसे बनाए रखने के लिए हमें निश्चिात रूप से झारखंड और भारत के आम.लोगों की सेवा में तथा उनके सामूहिक कल्याचण के लिए पूरी जिम्मेावारी से तथा नए उत्साेह से लगे रहना  होगा ।

3.  वर्ष 2013 में पंचायती राज के 20 वर्ष पूरे हो गए । हमारा मिलना बहुत ही  महत्व पूर्ण समय पर हो रहा है । जरूरत है कि  हम पंचायती राज के मूल उद्देश्यों को साकार करने के लिए एक  रोडमैप तैयार करें । जिससे कि विभिन्नी कार्यक्रमों व योजनाओं को  सही मायने में अच्छीय तरह से प्रभावी एवं लक्षित दिशा में लागू करने में हम सफल हो सकें । यह सच है कि  कार्योंए कोष व कर्मियों का  प्रभावी अंतरण किए बिना  पंचायती राज संस्थांएं प्रभावी रूप से कार्य नहीं कर पाएंगीए न ही  पंचायती राज के निर्वाचित प्रतिनिधिगण ग्राम सभा के प्रति अपने उत्तारदायित्वोंी का निर्वाह कर पाएंगे ।

 

4.  ग्राम सभा के विषय मेंए मुझे  विश्वा स है कि ग्राम सभा और विशेष ग्राम सभा की बैठकें  नियमित रूप से आयोजित की जा रही हैं । इन बैठकों में सामूहिक हित एवं जरूरत वाले  विषयों  की पहचान की जाती हैए उन पर विचार.विमर्श व चर्चा की जाती है एवं उनके अच्छेष.बुरे पहलुओं पर विचार कर विश्लेशषण किए जाते हैं । सशक्त   ग्राम सभाएं सुशासन की नींव है इसलिए हमारे मंत्रालय का यह लगातार प्रयास है कि ग्राम सभा के कार्य.कलाप को और प्रभावी एवं परिणाम दिलाने वाला बनाया जाए । ग्राम सभा में पेय जलए स्व च्छवताए महिला संबंधी मामलेए प्राथमिक शिक्षाए पोषणए टीकाकरणए कृषिए मृदा संरक्षणए जलए वनए केन्द्रीय व राज्य योजनाओं  के तहत लाभार्थियों का चयनए सोसल ऑडिटए खाद्य सुरक्षा एवं ग्रामीण आपदाओं से निपटने संबंधी योजनाएं जैसे अनेक  महत्वषपूर्ण मुद्दों पर विचार किया जाना चाहिए ।

5. पंचायती राज मंत्रालय ने अक्टूबर.नवंबरए 2013 में किसी भी दिन महिलाओं से जुड़े विषयों पर विशेष ग्राम सभा की बैठकें करने के लिए दिनांक 19ध्10ध्2013 को देश के सभी लोकिप्रय अखबारों में विज्ञापन द्वारा ग्राम पंचायतों से निवेदन किया है । जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से  इन बैठकों की तारीख इस प्रकार से नियत करने को  कहा गया है कि बैठक में उठाये जाने वाले विषयों से जुड़े अधिकारीगण भी निश्चि त रूप से विशेष ग्राम सभा की  बैठकों में भाग ले सकें । विषयदृविशेष पर इस तरह की बैठकें नियमित अंतराल पर होती रहनी चाहिए ।

6.  मुझे यह जान कर अपार  खुशी  हो  रही है कि झारखंड ने राज्ये पंचायती राज अधिनियम में संशोधन लाकर पंचायतों में महिलाओं के लिए 50ः आरक्षण का प्रावधान किया है। बहुत.सी महिलाएं अनारक्षित सीटों पर भी चुनाव लड़ीं और बड़े अंतराल से  जीत गईं । परिणाम यह  हुआ कि महिलाओं ने कुल मिलाकर 56: सीटों पर जीत हासिल कीं । इस बढ़ी हुई भागीदारी से निश्चित रूप से उनके आत्मविश्वास एवं आत्मसम्मान में वृद्धि होगी । रिपोर्टों से ज्ञात हुआ है कि झारखंड की पंचायतों में महिला नेतृत्व का प्रभाव बढ़ा है एवं राज्यर के कई हिस्सों में महिला नेतृत्व वाली पंचायतें अत्यंात सफल और स्थानीय शासन का उदाहरण बन रही हैं । वह  दिन दूर  नहीं  जब सभी पंचायतें प्रभावी भूमिका निभाने लगेंगी । पंचायतें एक ष्स्वयं पंचायत निगरानी प्रक्रियाष् के माध्यम से अपने कामकाज में पारदर्शिताए जवाबदेही और प्रभावशीलता सुनिश्चित कर अपने कार्य को  बेहतर बना सकती हैं । पंचायती राज को अभी काफी  लंबा रास्ता तय करना है । पंचायती राज  से जुड़े सभी लोगों की भागीदारी से ही हम पंचायती राज संस्थाओं को आम लोगों की आकांक्षाओं  को पूरा करने का ऊर्जावान मंच बना सकते हैं ।
7.  अगला पंचायत चुनाव वर्ष 2015 में होना है । इस कार्यकाल का आधा समय  पहले ही बीत चुका है। अपने पूरे कार्य.निष्पा्दन का विश्लेषण और मूल्यांलकन का यह  सर्वाधिक उपयुक्तं समय है। पंचायती राज संस्थाओं को वर्ष 2015 तक अपने लक्ष्यों व उद्देश्यों  को प्राप्त करने के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार कर लेना चाहिए । केवल तभी पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधि अपने मतदाताओं की आशाओं  व उम्मीदों को पूरा करने में सफल हो पाएंगे। इसके लिए सभी तीन स्तरों की पंचायतों के प्रतिनिधियों का समुचित प्रशिक्षण एवं  क्षमता विकास से काफी लाभ होगा । इससे  उन्हेंो  अपने  कार्यों को पूरा करने के लिए जरूरी  ज्ञान एवं  कुशलता प्राप्त  हो जाएगी। मुझे विश्वा स है कि राज्य ग्रामीण विकास संस्थान ;एसआईआरडीद्धए रांची ने हाल के कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए हैं। यह संस्था  झारखंड के पंचायती राज संस्थाौओं को स्थािनीय स्व .शासन के बारे में कार्य.उन्मुखी प्रशिक्षणए अनुसंधान और परामर्श प्रदान करने के लिए अधिदेशित है और झारखंड के क्षमता निर्माण गतिविधियों से जुड़े विषयों पर ध्यािन दे रहा है। मुझे हर्ष है कि आज मैं राज्य ग्रामीण विकास संस्थान ;एसआईआरडीद्धए रांची में आप लोगों  के बीच उपस्थि त हूं।

8.  यह  सर्वमान्यि  तथ्य  है कि  अपनी  विकास प्राथमिकताओं की पहचान करने तथा उसे पूरा करने में समर्थ और सशक्तस पंचायतों  का मजबूत एवं उत्कृिष्टं  नेटवर्क हमारे देश के विकास में अहम योगदान कर सकता है। हम सभी समावेशीए उत्तेरदायी एवं जवाबदेह नागरिक केन्द्रित स्थानीय शासन का अपने लंबी अवधि के उद्देश्यम को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैंए जिससे गांवों में परिवर्तन दिख सके । सरल शब्दों  मेंए हमें गावों में आधारभूत जन सुविधाओं के साथ.साथ जीवन.यापन की जरूरी रहने लायक स्थि तियोंए विशेषकर स्वास्थ्यए शिक्षाए ग्रामीण स्वच्छताए पेय जलए पोषणए प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के क्षेत्रों में ढांचागत संरचना का विकास करना है। ये सब तभी  किया जा सकेगा जब हमारे मंत्रालय के दो फ्लैगशिप कार्यक्रमों.पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि ;बीआरजीएफद्ध और राजीव गांधी पंचायत सशक्तिछकरण अभियान ;आरजीपीएसएद्ध दृसमेत विभिन्नर सरकारी योजनाओं के तहत प्रदान  की गई निधियों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चिजत किया जाए । झारखंड के 24 में से  23 जिले बीआरजीएफ में  शामिल हैं। मुझे आशा है कि ये सभी 23 जिले चालू वित्त वर्ष के दौरान पूरी किश्तें प्राप्ते कर लेंगे । SIRD - 29 Oct. Minister Panchayat (Minister)

 

9. पंचायती राज मंत्रालय  द्वारा पंचायतों को  सशक्तत बनाने की दिशा में  उठाया गया एक अन्यफ महत्व्पूर्ण कदम ष्राजीव गांधी पंचायत सशक्तिंकरण अभियानष् ;आरजीपीएसएद्ध नामक एक महत्वाूकांक्षी योजना की  शुरूआत है । इस योजना को चालू वित्तर वर्ष  से  पूरी तरह  लागू  किया जा रहा है । केंद्र एवं  राज्यआ सरकार के बीच इस योजना का फंडिग पैटर्न 75रू25 के अनुपात पर आधारित है । राज्यों  ध्संघ राज्य  क्षेत्रों  से निवेदन किया गया है कि वे स्की5म के दिशा.निदेशों के अनुसार वर्ष 2013.14 के लिए पर्सपेक्टिकव योजनाएं एवं वार्षिक योजनाएं तैयार कर इस मंत्रालय को भेज दें ताकि उन्हें  आरजीपीएसए की केंद्रीय कार्यकारी  समिति  के समक्ष रखा जा सके । यह  एक ऐसी योजना है जो राज्योंी को अपनी पंचायती राज प्रणाली को सशक्तक बनाने के लिए निधियां प्राप्तै करने का पर्याप्ती  अवसर  उपलब्ध  कराती है । आरजीपीएसए के अंतर्गत इन निधियों से वे ऐसी गतिविधियों को संचालित कर सकते हैंए जिसे वे अपने  संसाधनों से आंशिक तौर पर या पूरी तरह  पूरा करने में समर्थ नहीं हो पा रहे हैं । आरजीपीएसए के तहत  राज्यप योजनाओं में शामिल की जाने वाली गतिविधियों में प्रशासनिक एवं तकनीकी सहयोगए ग्राम पंचायत भवनए निर्वाचित प्रतिनिधियों एवं कर्मियों का क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षणए राज्यभए जिला एवं ब्लॉधक स्तिर पर प्रशिक्षण हेतु संस्थांगत संरचनाए पंचायतों की ई.सक्षमताए अपर्याप्ति राजस्व‍ आधार वाली पंचायतों में पंचायत कार्यवाही व कार्य प्रणाली में सहयोगए पेसा एवं  उत्तरर पूर्व के क्षेत्रों में ग्राम सभाओं के लिए विशेष सहायताए कार्यक्रम प्रबंधनए सूचनाए शिक्षा एवं संचार ;आईईसीद्धएराज्या चुनाव आयोग ;एसईसीद्ध को सुदृढ़ करना एवं राज्यों  में नवाचारी ;पददवअंजपअमद्ध गतिविधियां शामिल  है ।

 

 

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झारखंड के पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में पंचायतों एवं विशेषकर ग्राम सभाओं को पंचायतें अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तासर अधिनियमए 1996 जिसे पेसा अधिनियम के नाम से भी जाना जाता हैए के तहत विशेष भूमिकाएं  प्रदान की गई हैं । ऐसे  क्षेत्रों  में  ग्राम सभा की  बैठकें  मात्र ग्राम.पंचायत  स्तूर पर ही  आयोजित नहीं की जाएंगी बल्किं पल्लीी ;हैमलेटद्ध स्तूर पर भी आयोजित की जाएंगी। योजनाओंए कार्यक्रमों एवं आर्थिक विकास के कार्यक्रमों का अनुमोदन तथा गरीबी उपशमन एवं अन्य  कार्यक्रमों के तहत लाभार्थियों ;इमदमपिबपंतपमेद्ध की पहचान करने के लिए ग्राम सभा से परामर्श करना अनिवार्य है । भूमि अधिग्रहणए खननए लघु वन उत्पाादए भूमि हस्तांपतरण पर रोकए महाजनी पर नियंत्रण एवं उत्पांद के लिए ग्राम सभा एवं पंचायतों से परामर्श किया जाना आवश्यीक है। हालांकि राज्य‍ सरकार ने नागरिक कानूनों में कुछ प्रावधान किए हैए परंतु अभी भी बहुत सी ऐसी कमियां है जिन्हें  दूर करने के लिए उन्हेंम अपने नागरिक कानूनों में संशोधन करना होगा। अंततरू यह लोगों के

 

लिए है एवं पंचायतों को अपने उन अधिकारों को प्रयोग करना हैए जो उन्हेंि कानून के तहत प्रदान किए गए हैं । मैं आशा करता हूं कि बीआरजीएफ एवं आरजीपीएसए के क्षमता निर्माण घटक के तहत जारी निधियों का उपयोग पेसा अधिनियम एवं राज्य  सरकार के नागरिक कानूनों के प्रावधानों को लागू करने में पंचायत सदस्योंव की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए किया जाएगा ।

11.  जनजाजातीय कार्य मंत्री भी होने की वजह से झारखंड मेरे लिए अत्यंित महत्वंपूर्ण है। हाल के वर्षों में एक महत्वयपूर्ण कदम वन अधिकार अधिनियम के तहत वनवासियों को अधिकार प्रदान करना रहा है। इस अधिनियम एवं नियम के तहत लाभार्थियों ;इमदमपिबपंतपमेद्ध की पहचान की मूल जिम्मेकवारी ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा की है । मुझे विश्वादस है कि राज्यै सरकारए ग्राम पंचायत व ग्राम सभा के साथ निष्ठाै से  कार्य करती रही है । यदि इस मामले में कोई शिकायत हो तो हमें बताएंए हम अवश्य् ही उस पर ध्याहन देंगे।

12.  अब मेरी इच्छा  है कि आप अपनी बात कहें और मैं सुनूं । आप सभी अपने अच्छे  प्रयासों में सफलता पाएंए मैं इसकी शुभकामनाएं देता हूं।