सुशासन की गुड प्रैक्टिस

डॉ. विष्णु राजगढि़या


परिचय – क्या, क्यों, कैसे

JPWRC Logo copyझारखंड में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की बुनियाद सींचने में झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे पंचायतों की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के सशक्तिकरण की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति देखी जा रही है। इसे राज्य में सुशासन के अभिनव प्रयोग तथा समेकित विकास के समावेशी प्रयासों के अनुकरणीय उदाहरण की संज्ञा दी जा सकती है।

भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 27-28 जून 2013 को पंचायती राज संस्थाओं के क्षमता-वर्द्धन पर जयपुर में आयोजित कार्यशाला में झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर को एक गुड प्रेक्टिस के बतौर संकलित करने के लिए चयनित किया गया।

उस पहलकदमी का प्ररिप्रेक्ष्य एवं दृष्टिकोण
पंचायती राज के मामले में झारखंड की स्थिति पूरे देश की तुलना में बिल्कुल अलग एवं दयनीय है। पहले बिहार का अंग रह चुके इस राज्य को 32 साल तक पंचायती चुनाव नहीं होने का दंश झेलना पड़ा है। इसके कारण राज्य में पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी तथा नयी पीढ़ी को इसका ककहरा तक मालूम नहीं। अलग राज्य बनने के बाद दिसम्बर 2010 में पंचायती राज के लिए चुनाव हुए और गांवों में सरकार बनी। लेकिन इसके लिए जरूरी अधिसंरचना बिल्कुल नदारद थी। पर्याप्त कर्मियों तथा पंचायत भवनों के अभाव के कारण इस नयी व्यवस्था को सुचारू तरीके से लागू करना बड़ी चुनौती थी। इससे भी बढ़कर यह कि आम जनता और नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों से लेकर पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों तक को पंचायती राज व्यवस्था के काम-काज के तरीकों, परस्पर अधिकारों एवं कर्तव्यों इत्यादि की समुचित जानकारी नहीं थी। इन चुनौतियों के आलोक में झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर की पहल उल्लेखनीय कही जा रही है।

दरअसल झारखंड में पंचायती राज व्यवस्था की एक खास विशेषता है। यहां पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की कुल संख्या का लगभग 56 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है। पहली बार इतनी बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधियों के निर्वाचित होने की प्रमुख वजह झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 में 50 फीसदी पदों पर महिलाओं को दिया गया आरक्षण है।

लेकिन 50 फीसदी के आरक्षण के अलावा शेष सामान्य सीटों में छह प्रतिशत पदों पर सफलता पाकर महिलाओं ने अपनी जबरदस्त इच्छाशक्ति और क्षमता का एहसास कराया। इसके बावजूद विभिन्न सामाजिक, आर्थिक कारणों से महिला  पंचायत प्रतिनिधियों के लिए अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन करना काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। इसके लिए उन्हें समुचित सहयोगी परिवेश उपलब्ध कराकर सशक्तिकरण आवश्यक था।

क्रियान्वयन की प्रक्रिया एवं चुनौतियां, उनका मुकाबला
राज्य की चार संस्थाओं (सर्ड, यूनिसेफ, महिला आयोग एवं मंथन) की पहल से जुलाई 2012 में झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर का गठन इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग है। खास बात यह कि इन चारों संस्थाओं की अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी विशिष्टता एवं दक्षता है। सर्ड यानी राज्य ग्रामीण विकास संस्थान झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग का प्रशिक्षण केंद्र है। इसे राज्य में पंचायत राज संस्थाओं से संबंधित विभिन्न साझेदारों को प्रशिक्षित करने का भी दायित्व है।

यूनिसेफ एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो राज्य में खास तौर पर महिलाओं और बच्चों के कल्याण तथा सुशासन के क्षेत्र में निरंतर महत्वपूर्ण पहलकदमियों के लिए विख्यात है। राज्य महिला आयोग को झारखंड में महिलाओं के अधिकारों एवं सम्मान के संरक्षण तथा उनके सर्वांगीण विकास की दिशा में कदम उठाने का दायित्व एवं अधिकार प्राप्त है। मंथन युवा संस्थान एक स्वयंसेवी संगठन है जिसे पंचायती राज, ग्रामीण विकास एवं सुशासन संबंधी विषयों पर प्रशिक्षण एवं मीडिया संबंधी गतिविधियों में विशिष्टता प्राप्त है।

उस पहलकदमी की अवधि
इन चारों संस्थाओं ने राज्य में पंचायती राज व्यवस्था की बुनियाद को सींचने तथा खास तौर पर महिला प्रतिनिधियों के सशक्तिकरण के लिए एक मंच पर आकर समावेशी प्रयास के बतौर जुलाई 2012 में झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर को क्रियाशील किया। इसके राज्य समन्वयक के बतौर एक अनुभवी मीडिया विशेषज्ञ एवं सामाजिक कार्यकत्र्ता को दायित्व सौंपा गया जिसकी सेवाएं यूनिसेफ की तरफ से उपलब्ध करायी गयी। राज्य ग्रामीण विकास संस्थान ने हेहल, रांची स्थित अपने दक्षिणी परिसर में इस रिसोर्स सेंटर के लिए सुसज्जित कक्ष उपलब्ध कराया।

राज्य महिला आयोग तथा मंथन युवा संस्थान ने भी विभिन्न संसाधनों एवं पहलकदमियों के माध्यम से इस केंद्र को गतिशील स्वरूप प्रदान किया। राज्य महिला आयोग ने महिलाओं एवं बच्चों के अपसारण (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) को रोकने में महिला पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण का सिलसिला शुरू किया। राज्य महिला आयोग ने यूएन वुमन कमिशन के सहयोग से 25 से 27 सितंबर 2012 तक सर्ड में टीओटी का आयोजन किया। विषय था- घरेलू हिंसा एवं महिलाओं की ट्रेफिकिंग रोकने में पंचायत की भूमिका। इसी विषय पर सभी जिलों में भी प्रशिक्षण दिया गया।

मंथन युवा संस्थान ने पंचायत आॅब्जर्बर नामक पाक्षिक का प्रकाशन शुरू करके पंचायती राज संबंधी विभिन्न पहलुओं पर संवाद का अवसर उपलब्ध कराया। मंथन युवा संस्थान द्वारा लोहरदगा जिले सहित राज्य के कई जिलों में पंचायती राज संस्थाओं के क्षमता-वर्द्धन के लिए प्रयास किये जा रहे हैं।

सफलता का परिणाम, क्या हुआ हासिल
झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर के रूप में प्रारंभ की गयी यह पहल राज्य की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के सशक्तिकरण का आधार बनकर सामने आयी है। प्रारंभ में ही इस संेटर द्वारा निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं के आकलन के लिए एक प्रशिक्षण आवश्यकता आकलन कार्यक्रम (टीएनए) आयोजित किया गया। इसमें राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की निर्वाचित महिला पंचायत प्रतिनिधियों ने शरीक होकर अपने दैनंदिन के काम-काज में आने वाली जटिलताओं एवं चुनौतियों की जानकारी देकर इस आकलन में सहयोग किया कि उनके लिए प्रशिक्षण संबंधी कार्यक्रम किस रूप में संचालित किए जाने चाहिए।

इस क्रम में राज्य की निर्वाचित महिला पंचायत प्रतिनिधियों की वत्र्तमान स्थिति के आकलन पर आधारित एक स्टेटस रिपोर्ट भी तैयार की गई। यह रिपोर्ट इस रिसोर्स संेटर की प्राथमिकताओं एवं गतिविधियों को सुनिश्चित करने तथा अपने लक्ष्य को क्रियान्वित करने का आधार बनी। झारखंड में निर्वाचित महिला पंचायत प्रतिनिधियों की वस्तुस्थिति के आकलन का दस्तावेज तैयार हुआ। इसमें महिला पंचायत प्रतिनिधियों से चर्चा के आधार उनकी सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, राजनीतिक स्थितियों एवं चुनौतियों के आकलन के साथ ही उनके दैनंदिन के कामकाज में आने वाली प्रशासनिक जटिलताओं के संबंध में वस्तुस्थिति की जानकारी ली गयी। इससे महिला पंचायत प्रतिनिधियों के संबंध में कार्ययोजना तैयार करने तथा उनके लिए प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार करने में मदद मिली। इस दस्तावेज के आधार पर एक्शन प्लान बनाया गया जो इस रिसोर्स सेंटर के संचालन में उपयोगी है।

झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर ने राज्य में पंचायती राज संबंधी गतिविधियों से जुड़े प्रमुख स्वयंसेवी संगठनों को एक मंच पर लाकर उनके अनुभवों को साझा करने तथा परस्पर समन्वय पर आधारित गतिविधियों को बढ़ाने की दिशा में भी पहल की। राज्य में क्रियाशील ऐसे स्वयंसेवी संगठनों की जानकारी एक जगह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘‘झारखंड राज्य पंचायत रिसोर्स डायरी’’ के प्रकाशन की भी पहल की गयी।

राज्य ग्रामीण विकास संस्थान ने नियमित रूप से आयोजित होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रशिक्षणार्थियों को पंचायती राज व्यवस्था संबंधी विभिन्न प्रासंगिक पहलुओं का प्रशिक्षण देने का काम भी प्राथमिक तौर पर किया जाने लगा। खास तौर पर महिला पंचायत प्रतिनिधियों के लिए विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए गए। इनमें उन्हें विभिन्न  विषयों पर थिमेटिक प्रशिक्षण प्रदान करना तथा तकनीकि रूप से मजबूत करने के लिए कम्प्यूटर संबंधी प्रशिक्षण देना भी एक आवश्यक कदम माना गया। इसके लिए राज्य ग्रामीण विकास संस्थान में विभिन्न प्रशिक्षण लगातार संचालित किये जा रहे हैं।

इस केंद्र की एक बड़ी पहल राज्य की निर्वाचित महिला पंचायत प्रतिनिधियों की अनुकरणीय उपलब्धियों, गुड प्रैक्टिसेस का संकलन किया जाना भी है। इसके लिए विकास संचार से जुड़े स्वतंत्र पत्रकारों की मदद से क्षेत्र भ्रमण पर आधारित गुड प्रैक्टिसेस का संकलन किया गया जो राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के माध्यम से प्रकाशित किया गया है। पंचायत की पगडंडी शीर्षक इस संकलन में राज्य की 34 महिला पंचायत प्रतिनिधियों की गुड प्रेक्टिसेस संकलित की गयी है।

गुड प्रेक्टिसेस के इस संकलन के साथ एक महत्वपूर्ण तथ्य जुड़ा है। राज्य में पंचायतों को कार्य, कर्मी एवं निधियों का समुचित रूप से हस्तांतरण नहीं होने के कारण पंचायत प्रतिनिधियों में आम तौर पर गहरी निराशा का भाव रहा है। ऐसे में जब इस संकलन के लिए महिला पंचायत प्रतिनिधियों से उनकी सकारात्मक उपलब्धियों की बात की जाती तो एक सामान्य नकारात्मक जवाब मिलता- हमें तो कोई अधिकार ही नहीं मिला है, तो काम क्या होगा।

लेकिन चर्चा के क्रम में जब उनके क्षेत्र में हुए कामों पर विस्तार से काम की जाती तो पता चलता कि कई ऐसे काम हुए हैं जो वाकई सराहनीय हैं। यह अलग बात है कि स्वयं उन पंचायत प्रतिनिधियों को अभी इसका महत्व समझ में नहीं आ रहा हो। इस प्रक्रिया में जब अलग-अलग क्षेत्रों एवं अलग अलग विषयवस्तु को ध्याान में रखकर 34 सक्सेस स्टोरीज या गुड प्रेक्टिसेस का संकलन किया गया, तो इन्हें देखकर सबको सोचने का मौका मिला है। इस संकलन को देखकर कई पंचायत प्रतिनिधि सहज ही बोल उठते हैं कि ऐसे काम तो हमारे यहां भी हुए हैं। ऐसे लोगों को हम अब आसानी से समझा पा रहे हें कि पंचायत प्रतिनिधि के बतौर आपसे ऐसे ही छोटे-छोटे कदमों की अपेक्षा की जा रही है।

इस संकलन के अलावा, विभिन्न प्रकाशनों के लिए भी झारखंड की पंचायतों की सक्सेस स्टोरीज उपलब्ध कराने का काम झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर के माध्यम से किया गया है। भारत सरकार के पंचायती राज विभाग के प्रकाशनाधीन आईकाॅनस् आॅफ रूरल इंडिया नामक सक्सेस स्टोरीज के संकलन हेतु लगभग आधा दर्जन केस स्टडीज उपलब्ध कराये गये। गुजरात में हुए वाइब्रंेट इंडिया समारोह में भी इस केंद्र की स्टोरी भेजी गयी। राष्ट्रीय स्तर की एक न्यूज एजेंसी ने भी हमारी इन स्टोरीज को लिया है। झारखंड से प्रकाशित साप्ताहिक पंचायतनामा ने भी हमारी कई स्टोरी प्रकाशित की है।

जेपीडब्लूआरसी के संबंध में एक विवरण ब्राॅसर का प्रकाशन करके पंचायत हेल्पलाइन के नम्बर भी वितरित किए गए। साथ ही जेपीडब्लूआरसी डाॅट ब्लाॅगस्पाॅट डाॅट इन नामक एक ब्लाॅग बना कर इंटरनेट पर पंचायत राज से संबंधित विभिन्न जानकारियों एवं दस्तावेजों को उपलब्ध कराने का भी प्रयोग किया गया।

दिसम्बर 2012 में पंचायती राज व्यवस्था के झारखंड में दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर विभिन्न समाचार पत्रों में पंचायती राज के संबंध में प्रकाशित खबरों की कतरनों पर आधारित 150 पृष्ठों का एक संकलन भी स्पाईरल बाईंड प्रिंटिग कराकर पंचायती राज संबंधी विभिन्न साझेदारों के बीच वितरित किया गया।

झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर ने केंद्र एवं राज्य सरकार की पंचायत राज संबंधी विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के संचालन में भी विशिष्ट सहयोग प्रदान किया। राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान पर राज्य स्तरीय कार्यशाला के आयोजन का दायित्व सर्ड को मिलने पर इसके क्रियान्वयन में भी जेपीडब्लूआरसी की भूमिका रही। केंद्र सरकार के पंचायत महिला एवं युवा शक्ति अभियान, पायस योजना, भारत निर्माण योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास फेलोशिप योजना इत्यादि में इस रिसोर्स सेंटर ने विभिन्न रूपों में सहयोगी भूमिका निभाई। इसके कारण राज्य ग्रामीण विकास संस्थान को पंचायती राज व्यवस्था के विभिन्न आयामों पर केंद्रित एक विशिष्ट संस्थान के बतौर अपनी अलग पहचान कायम करने में मदद मिली। इस तरह झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर ने राज्य में सुशासन की एक अच्छी पहल का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर का उद्देश्य
महिला पंचायत प्रतिनिधियों का सशक्तिकरण
झारखंड में पंचायत के लगभग 57 प्रतिषत पदों पर महिलाओं ने सफलता पायी है। इनमें कुछ महिला प्रतिनिधियों के लिए उनका शैक्षणिक, सामाजिक, राजनीतिक या आर्थिक स्तर बाधा बनता है। कुछ प्रतिनिधियों के लिए सामाजिक व्यवस्था के कारण परिवार के पुरुषों पर निर्भरता देखी जाती है। इसलिए, पंचायती राज के सफल क्रियान्वयन एवं ग्रामीण विकास के लिए महिला पंचायत प्रतिनिधियों के सषक्तिकरण करने हेतु यह केंद्र बनाया गया है।
यह रांची के हेहल स्थित राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (साउथ कैंपस, काजू बगान) में स्थित है। यह रांची के पिस्का मोड़ से पंडरा जाने वाले रास्ते के बीच है।

प्रमुख कार्य एवं गतिविधियां
1. पंचायती राज तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी सरकारी, गैरसरकारी व निजी संस्थाओं, शोधकर्ताओं एवं शैक्षणिक संस्थाओं, पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं मीडियाकर्मियों के साथ संवाद एवं नेटवर्क बनाकर एक राज्यस्तरीय संसाधन केंद्र बनाना।
2. महिला पंचायत प्रतिनिधियों के साथ संवाद और नेटवर्किंग करते हुए इन-कैंपस तथा आॅफ-कैंपस प्रशिक्षण व क्षमता-विकास संबंधी गतिविधियां संचालित करना।
3. सरकारी योजनाओं तथा प्रषासनिक कामकाज की पद्धति के संबंध में महिला पंचायत प्रतिनिधियों की समझ बढ़ाना।
4. पंचायती राज के सफल प्रयोगों का दस्तावेजीकरण व प्रकाषन करके उनका प्रचार-प्रसार करना तथा ऐसे उदाहरण दिखाने के लिए भ्रमण आयोजित कराना।
5. पंचायती राज से जुड़े कानूनों, नियमों, परिपत्रों, ग्रामीण विकास योजनाओं, कानूनों इत्यादि के संबंध में जानकारियों का संकलन व प्रकाषन करना ताकि पंचायत प्रतिनिधियों व समुदाय को आसानी से इसकी उपलब्धता हो।
6. ग्रामीण विकास संबंधी प्रमुख योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के माध्यम से मिलेनियम डवलपमेंट गोल हासिल करने की दिशा में महिला पंचायत प्रतिनिधियों का तकनीकी एवं प्रशासनिक क्षमता विकास करके उनकी क्षमता बढ़ाना।
प्रमुख उपलब्धियां
1. झारखंड में निर्वाचित महिला पंचायत प्रतिनिधियों की वस्तुस्थिति के आकलन संबंधी रिपोर्ट का निर्माण।
2. विभिन्न विषयों पर पंचायत प्रतिनिधियां खासकर महिला प्रतिनिधियों का इन-कैंपस तथा आॅफ-कैंपस प्रशिक्षण आयोजित करना।
3. झारखंड में पंचायती राज के दो साल पूरे होने पर आठ फरवरी 2013 को रांची के होटल अशोका में राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन।
4. झारखंड में 34 महिला पंचायत प्रतिनिधियों के सफल प्रयोगों का संकलन एवं प्रकाशन। पंचायत की पगडंडी शीर्षक इस पुस्तक के विमोचन के दौरान 12 जून 2013 को इन महिला प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया।
5. पंचायती राज के दो साल: खबरों के आइने में – शीर्षक संकलन का स्पाइरल प्रकाशन।
6. विभिन्न विभागों द्वारा पंचायतों को सौंपी गयी शक्तियों से संबंधित संकल्पों का संकलन एवं आम समझ की भाषा में संपादित करके पंचायत प्रतिनिधियों के बीच वितरण।
7. इंटरनेट पर ब्लाॅग – रचूतबण्इसवहेचवजण्पद के माध्यम से प्रमुख जानकारी देना।
8. पंचायती राज संबंधी कार्यों से जुड़े स्वयंसेवी संगठनों का डाटाबेस – पंचायत रिसोर्स डायरी का संकलन।
9. आंगनबाड़ी, आइसीडीएस सेवाओं एवं स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका एवं शक्तियों तथा चेक लिस्ट का आम समझ की भाषा में संकलन एवं वितरण।
10. भारत निर्माण सेवक, प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास फेलोशिप, पंचायत महिला शक्ति अभियान, राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान, पंचायत इम्पावरमेंट एंड एकाउंटिबिलिटी इंसेंटिव स्कीम (पायस) इत्यादि योजनाओं तथा झारखंड राज्य महिला आयोग द्वारा घरेलू हिंसा व मानव तस्करी के खिलाफ अभियान में सहयोग।
11. जिंदल स्टील, आधुनिक पावर जैसे कारपोरेट घरानों तथा विकास भारती, आक्सफेम इंडिया जैसे स्वयंसेवी समूहों के साथ सहयोग पर आधारित प्रशिक्षण एवं कार्यक्रमों का आयोजन।
12. मनरेगा के सफल कियान्वयन एवं विभिन्न विकास योजनाओं में पंचायतों की भूमिका, कल्याणकारी योजनाओं में पंचायतों की भूमिका तथा ग्राम रक्षा दल के कार्य इत्यादि के संबंध में नियमों का संकलन एवं वितरण।
13. राज्य के पर्यटन विकास में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका सुनिश्चित करने के संबंध में झारखंड के पर्यटन विकास विभाग के वरीय पदाधिकारियों को लिखित सुझाव दिये गये जिस पर सकारात्मक पहल हुई है।
हमें चाहिए आपकी मदद
आप इन तरीकों से हमें मदद कर सकते हैं-
1.    पंचायत महिला प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता-विकास हेतु हमारे साथ साझा कार्यक्रम आयोजित करना।
2.    पंचायत राज की सफलता एवं नये प्रयोगों संबंधी जानकारी, स्टोरीज, तसवीरें, सीडी इत्यादि उपलब्ध कराना और वितरण हेतु अपनी प्रचार सामग्री प्रदान करना।
3.    पंचायत महिला प्रतिनिधियों हेतु एक्सपोजर विजिट आयोजित करना।
4.    पंचायत राज संस्थाओं एवं अधिसंरचना को मजबूत करने में मदद करना।
5.    पंचायत राज से जुड़े कार्यक्रमों तथा ग्रामीण विकास योजनाओं में महिला प्रतिनिधियों की प्रभावी भूमिका हेतु संसाधन उपलब्ध कराना।