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झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर की स्थापना जुलाई 2012 में हुई थी। राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार), यूनिसेफ, झारखंड राज्य महिला आयोग एवं मंथन युवा संस्थान की संयुक्त पहल पर इस अभिनव प्रयोग की शुरूआत हुई। यह राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (सर्ड) के दक्षिणी परिसर, हेहल, रांची में कार्यरत है।

एक साल के भीतर इस सेंटर ने राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के सुदृढि़करण में कई ठोस कदम उठाये हैं। झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की बुनियाद सींचने में झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे पंचायतों की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के सशक्तिकरण की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति देखी जा रही है। इसे राज्य में सुशासन के अभिनव प्रयोग तथा समेकित विकास के समावेशी प्रयासों के अनुकरणीय उदाहरण की संज्ञा दी जा सकती है।

यही कारण है कि भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 27-28 जून 2013 को पंचायती राज संस्थाओं के क्षमता-वर्द्धन पर जयपुर में आयोजित कार्यशाला में झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर को एक गुड प्रेक्टिस के बतौर संकलित करने के लिए चयनित किया गया।

पंचायती राज के मामले में झारखंड की स्थिति पूरे देश की तुलना में बिल्कुल अलग है। पहले बिहार का अंग रह चुके इस राज्य को 32 साल तक पंचायती चुनाव नहीं होने का दंश झेलना पड़ा है। इसके कारण राज्य में पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह शिथिल हो चुकी थी तथा नयी पीढ़ी को इसका ककहरा तक मालूम नहीं था। अलग राज्य बनने के बाद दिसम्बर 2010 में पंचायती राज के लिए चुनाव हुए और गांवों में सरकार बनी। लेकिन इसके लिए जरूरी अधिसंरचना बिल्कुल नदारद थी। पर्याप्त कर्मियों तथा पंचायत भवनों के अभाव के कारण इस नयी व्यवस्था को सुचारू तरीके से लागू करना बड़ी चुनौती थी। इससे भी बढ़कर यह कि आम जनता और नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों से लेकर पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों तक को पंचायती राज व्यवस्था के काम-काज के तरीकों, परस्पर अधिकारों एवं कर्तव्यों इत्यादि की समुचित जानकारी नहीं थी। इन चुनौतियों के आलोक में झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर का गठन करने की जरूरत समझी गयी।

दरअसल झारखंड में पंचायती राज व्यवस्था की एक खास विशेषता है। यहां पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की कुल संख्या का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है। पहली बार इतनी बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधियों के निर्वाचित होने की प्रमुख वजह झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 में महिलाओं को 50 फीसदी पदों पर दिया गया आरक्षण है।

इस 50 फीसदी के आरक्षण के साथ ही सामान्य सीटों में भी शानदार सफलता पाकर झारखंड की महिलाओं ने अपनी जबरदस्त इच्छाशक्ति और क्षमता का एहसास कराया। इसके बावजूद विभिन्न सामाजिक, आर्थिक कारणों से महिला  पंचायत प्रतिनिधियों के लिए अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन करना काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। इसके लिए उन्हें समुचित सहयोगी परिवेश उपलब्ध कराकर सशक्तिकरण आवश्यक था।

इसी पृष्ठभूमि में राज्य की चार संस्थाओं (सर्ड, यूनिसेफ, महिला आयोग एवं मंथन) की पहल से झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर का प्रयोग सामने आया। इस प्रयोग की एक खास बात यह कि इन चारों संस्थाओं की अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी विशिष्टता एवं दक्षता है। सर्ड यानी राज्य ग्रामीण विकास संस्थान झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग का प्रशिक्षण केंद्र है। इसे राज्य में ग्रामीण विकास संबंधी विभिन्न प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के साथ ही पंचायत राज संस्थाओं से संबंधित विभिन्न साझेदारों को प्रशिक्षित करने का भी दायित्व है।

यूनिसेफ एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो राज्य में खास तौर पर महिलाओं और बच्चों के कल्याण तथा सुशासन के क्षेत्र में निरंतर महत्वपूर्ण पहलकदमियों के लिए विख्यात है। राज्य महिला आयोग को झारखंड में महिलाओं के अधिकारों एवं सम्मान के संरक्षण तथा उनके सर्वांगीण विकास की दिशा में कदम उठाने का दायित्व एवं अधिकार प्राप्त है। मंथन युवा संस्थान एक स्वयंसेवी संगठन है जिसे पंचायती राज, ग्रामीण विकास एवं सुशासन संबंधी विषयों पर प्रशिक्षण एवं मीडिया संबंधी गतिविधियों में विशिष्टता प्राप्त है।

इन चारों संस्थाओं ने राज्य में पंचायती राज व्यवस्था की बुनियाद को सींचने तथा खास तौर पर महिला प्रतिनिधियों के सशक्तिकरण के लिए एक मंच पर आकर समावेशी प्रयास के बतौर झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर को क्रियाशील किया। इसके राज्य समन्वयक के बतौर एक अनुभवी मीडिया विशेषज्ञ एवं सामाजिक कार्यकत्र्ता को दायित्व सौंपा गया जिसकी सेवाएं यूनिसेफ की तरफ से उपलब्ध करायी गयी। राज्य ग्रामीण विकास संस्थान ने हेहल, रांची स्थित अपने दक्षिणी परिसर में इस रिसोर्स सेंटर के लिए सुसज्जित कक्ष उपलब्ध कराया।

राज्य महिला आयोग तथा मंथन युवा संस्थान ने भी विभिन्न संसाधनों एवं पहलकदमियों के माध्यम से इस केंद्र को गतिशील स्वरूप प्रदान किया। राज्य महिला आयोग ने महिलाओं एवं बच्चों के अपसारण (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) को रोकने में महिला पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण का सिलसिला शुरू किया। राज्य महिला आयोग ने यूएन वुमन कमिशन के सहयोग से 25 से 27 सितंबर 2012 तक सर्ड में टीओटी का आयोजन किया। विषय था- घरेलू हिंसा एवं महिलाओं की ट्रेफिकिंग रोकने में पंचायत की भूमिका । इसी विषय पर सभी जिलों में भी प्रशिक्षण दिया गया।

मंथन युवा संस्थान ने पंचायत आॅब्जर्बर नामक पाक्षिक का प्रकाशन शुरू करके पंचायती राज संबंधी विभिन्न पहलुओं पर संवाद का अवसर उपलब्ध कराया। मंथन युवा संस्थान द्वारा लोहरदगा जिले सहित राज्य के कई जिलों में पंचायती राज संस्थाओं के क्षमता-वर्द्धन के लिए प्रयास किये जा रहे हैं।

झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर के रूप में प्रारंभ की गयी यह पहल राज्य की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के सशक्तिकरण का आधार बनकर सामने आयी है। प्रारंभ में ही इस संेटर द्वारा निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं के आकलन के लिए एक प्रशिक्षण आवश्यकता आकलन कार्यक्रम (टीएनए) आयोजित किया गया। इसमें राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की निर्वाचित महिला पंचायत प्रतिनिधियों ने शरीक होकर अपने दैनंदिन के काम-काज में आने वाली जटिलताओं एवं चुनौतियों की जानकारी देकर इस आकलन में सहयोग किया कि उनके लिए प्रशिक्षण संबंधी कार्यक्रम किस रूप में संचालित किए जाने चाहिए।

इस क्रम में राज्य की निर्वाचित महिला पंचायत प्रतिनिधियों की वत्र्तमान स्थिति के आकलन पर आधारित एक स्टेटस रिपोर्ट भी तैयार की गई। यह रिपोर्ट इस रिसोर्स संेटर की प्राथमिकताओं एवं गतिविधियों को सुनिश्चित करने तथा अपने लक्ष्य को क्रियान्वित करने का आधार बनी। झारखंड में निर्वाचित महिला पंचायत प्रतिनिधियों की वस्तुस्थिति के आकलन का दस्तावेज तैयार हुआ। इसमें महिला पंचायत प्रतिनिधियों से चर्चा के आधार उनकी सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, राजनीतिक स्थितियों एवं चुनौतियों के आकलन के साथ ही उनके दैनंदिन के कामकाज में आने वाली प्रशासनिक जटिलताओं के संबंध में वस्तुस्थिति की जानकारी ली गयी। इससे महिला पंचायत प्रतिनिधियों के संबंध में कार्ययोजना तैयार करने तथा उनके लिए प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार करने में मदद मिली। इस दस्तावेज के आधार पर एक्शन प्लान बनाया गया जो इस रिसोर्स सेंटर के संचालन में उपयोगी है।

झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर ने राज्य में पंचायती राज संबंधी गतिविधियों से जुड़े प्रमुख स्वयंसेवी संगठनों को एक मंच पर लाकर उनके अनुभवों को साझा करने तथा परस्पर समन्वय पर आधारित गतिविधियों को बढ़ाने की दिशा में भी पहल की। राज्य में क्रियाशील ऐसे स्वयंसेवी संगठनों की जानकारी एक जगह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘‘झारखंड राज्य पंचायत रिसोर्स डायरी’’ के प्रकाशन की भी पहल की गयी।

राज्य ग्रामीण विकास संस्थान ने नियमित रूप से आयोजित होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रशिक्षणार्थियों को पंचायती राज व्यवस्था संबंधी विभिन्न प्रासंगिक पहलुओं का प्रशिक्षण देने का काम भी प्राथमिक तौर पर किया जाने लगा। खास तौर पर महिला पंचायत प्रतिनिधियों के लिए विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए गए। इनमें उन्हें विभिन्न  विषयों पर थिमेटिक प्रशिक्षण प्रदान करना तथा तकनीकी रूप से मजबूत करने के लिए कम्प्यूटर संबंधी प्रशिक्षण देना भी एक आवश्यक कदम माना गया। इसके लिए राज्य ग्रामीण विकास संस्थान में विभिन्न प्रशिक्षण लगातार संचालित किये जा रहे हैं।

इस केंद्र की एक बड़ी पहल राज्य की निर्वाचित महिला पंचायत प्रतिनिधियों की अनुकरणीय उपलब्धियों, गुड प्रैक्टिसेस का संकलन किया जाना भी है। इसके लिए विकास संचार से जुड़े स्वतंत्र पत्रकारों की मदद से क्षेत्र भ्रमण पर आधारित गुड प्रैक्टिसेस का संकलन किया गया जो राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के माध्यम से प्रकाशित किया गया है। पंचायत की पगडंडी शीर्षक इस संकलन में राज्य की 34 महिला पंचायत प्रतिनिधियों की गुड प्रेक्टिसेस संकलित की गयी है।
राज्य में अनुकरणीय कार्य कर रही महिला पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानित करके अन्य सभी प्रतिनिधियों का उत्साह बढ़ाने के उद्देश्य से 12 जून 2013 को सर्ड में झारखंड पंचायत महिला प्रतिनिधि सम्मान का आयोजन किया गया। इसमें माननीय राज्यपाल के सलाहकार श्री मधुकर गुप्ता के साथ ही श्री आर.एस. पोद्दार, प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास विभाग एवं श्री जाॅब जकारिया, राज्य प्रमुख, यूनिसेफ ने 34 महिला पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर सुनो-सुनो मेरी आवाज  नामक एक संगीतमय चित्र प्रस्तुति भी की गयी।

झारखंड पंचायत महिला प्रतिनिधि सम्मान तथा पंचायत की पगडंडी के प्रकाशन का एक  महत्वपूर्ण एवं स्पष्ट लक्ष्य है। राज्य में पंचायतों को कार्य, कर्मी एवं निधियों का समुचित रूप से हस्तांतरण नहीं होने के कारण पंचायत प्रतिनिधियों में आम तौर पर गहरी निराशा का भाव रहा है। ऐसे में किसी भी प्रशिक्षण अथवा कार्यक्रम के दौरान जब कभी महिला पंचायत प्रतिनिधियों से उनकी सकारात्मक उपलब्धियों की बात की जाती तो प्रायः एक सामान्य नकारात्मक जवाब मिलता- हमें तो कोई अधिकार ही नहीं मिला है, तो काम क्या होगा। पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा अपनी इस निराशा को सार्वजनिक मंचों और सड़कों पर सामने लाया जा रहा था।

लेकिन गुड प्रेक्टिसेस के संकलन हेतु महिला प्रतिनधियों से चर्चा के क्रम में जब उनके क्षेत्र में हुए कामों पर विस्तार से काम की जाती तो पता चलता कि कई ऐसे काम हुए हैं जो वाकई सराहनीय हैं। यह अलग बात है कि स्वयं उन पंचायत प्रतिनिधियों को अभी इसका महत्व समझ में नहीं आ रहा हो। इस प्रक्रिया में जब अलग-अलग क्षेत्रों एवं अलग अलग विषयवस्तु को ध्याान में रखकर 34 सक्सेस स्टोरीज या गुड प्रेक्टिसेस का संकलन किया गया, तो इन्हें देखकर सबको सोचने का मौका मिला है। इस संकलन को देखकर कई पंचायत प्रतिनिधि सहज ही बोल उठते हैं कि ऐसे काम तो हमारे यहां भी हुए हैं। ऐसे लोगों को हम अब आसानी से समझा पा रहे हैं कि पंचायत प्रतिनिधि के बतौर आपसे ऐसे ही छोटे-छोटे कदमों की अपेक्षा की जा रही है।

इस संकलन के अलावा, विभिन्न प्रकाशनों के लिए भी झारखंड की पंचायतों की सक्सेस स्टोरीज उपलब्ध कराने का काम झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर के माध्यम से किया गया है। भारत सरकार के पंचायती राज विभाग के प्रकाशनाधीन आईकाॅनस् आॅफ रूरल इंडिया नामक सक्सेस स्टोरीज के संकलन हेतु लगभग आधा दर्जन केस स्टडीज उपलब्ध कराये गये। गुजरात में हुए वाइब्रंेट इंडिया समारोह में भी इस केंद्र की स्टोरी भेजी गयी। राष्ट्रीय स्तर की एक न्यूज एजेंसी ने भी इन स्टोरीज को लिया है। झारखंड से प्रकाशित साप्ताहिक पंचायतनामा ने भी कई स्टोरी प्रकाशित की है।

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